Kushinagar: जनपद के खड्डा थाना क्षेत्र से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां एक तरफ बेटी की शादी की रस्में चल रही थीं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल की कथित लापरवाही ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने निजी अस्पताल के संचालक और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
शादी की रस्मों के बीच उठी अर्थी ?

जानकारी के अनुसार, खड्डा क्षेत्र के ग्राम मठिया बुजुर्ग निवासी गोबरी यादव की पुत्री रुचि की शादी 9 मार्च को तय थी। बीती रात जब दूल्हा सुजीत यादव बारात लेकर दरवाजे पर पहुंचा और शादी की रस्में निभाई जा रही थीं, तभी गोबरी के पुत्र दीनदयाल की गर्भवती पत्नी नीतू (25 वर्ष) को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल ?
परिजन आनन-फानन में नीतू को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खड्डा ले गए, जहां से डॉक्टर ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। हालांकि, परिजन उसे लेकर कोटवा स्थित एक निजी अस्पताल पहुंच गए। परिजनों का आरोप है कि:
डॉक्टरों की भारी लापरवाही के कारण जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। मौत होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने उन्हें जीवित बताया और अपने निजी वाहन से जिला अस्पताल भेज दिया।
जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का फूटा गुस्सा, कार्रवाई की मांग घटना की सूचना मिलते ही शादी वाले घर में कोहराम मच गया। आनन-फानन में बेटी की विदाई कर परिजन और ग्रामीण कोटवा स्थित निजी अस्पताल पहुंच गए और अस्पताल का घेराव किया। आक्रोशित परिजन अस्पताल संचालक और दोषी डॉक्टरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए नेबुआ नौरंगिया पुलिस का इंतजार किया जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।



